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आपके परिवार  के बारे में बताएं

 बालोतरा में मेरे पिताजी के साथ में हम तीन भाई है मैं सबसे बड़ा हूं दो मेरे से छोटे भाई हैं जो जोधपुर में रहते हैं बाड़मेर के पास छोटा सा गांव है शिवकर वहां से मेरे पिताजी 33 साल पहले बालोतरा आ गए थे मेरे जन्म के 3 साल बाद वह बालोतरा आए थे फिर यहीं बस गए और मेरी शिक्षा मेरे भाइयों की शिक्षा यहीं पर हुई और अभी मैं मेरे माता-पिता के साथ में यही बालोतरा में रहता हूं

शिक्षा में  आपने एजयुकेशन कहां तक किया

 दसवीं तक मैंने आदर्श विद्या मंदिर मैं पढ़ाई की जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक का एक विद्या भारती नाम से  संस्था चलती है जो शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करता है दसवीं तक मैं वहां पड़ा उसके बाद 12वीं की  उसके बाद मैं कॉलेज गया मेरा B A आधा अधूरा है


यह आपका B A आधा अधूरा कैसे रहा

 मुझे संगीत का बहुत शौक था तो मैं संगीत के कारण  कॉलेज जा ही नहीं पाता था फर्स्ट ईयर मैंने किया और सेकंड ईयर जब हुआ तो मैं इसमें लग गया और कुछ समय मैं कॉलेज नहीं गया फिर पढ़ाई छूट गई परीक्षा   जब आई पढ़ाई नहीं की थी तो मुझे लगा कि मैं परीक्षा में क्या लिखूंगा इसलिए मैंने परीक्षा ही नहीं दी

 
लेकिन आपने संगीत में बहुत कुछ लिख दिया शायद आपके   किस्मत को यही मंजूर था

 मेरे भाग्य में यही लिखा था बहुत सारे हो सकते है इसके प्रशन उत्तर लेकिन मेरी किस्मत शायद भगवान ने यही लिखी थी बहुत कुछ पीछे होता गया लेकिन किस्मत में ऐसा लिखा था इसीलिए उसी जगह से मैंने अपने जीवन को आगे बढ़ाया


आपका जो परिवार है वो संगीत से ताल्लुक नहीं रखता

 देखो जब मैं पढ़ता था तब मुझे प्रार्थना बोलने का बहुत शौक था गाने का भी शौक था मेरे  शिक्षकों को अच्छा लगता तो प्रार्थना मुझसे करवाते थे जब मैने दसवीं  की तो उसके बाद हमारे आजू-बाजू जो छोटे जागरण होते थे जैसे घर में सत्संग मंदिरों में तो मैं चला जाता था कुछ मैं रामनिवास जी राव के बहुत सारे ऑडियो पूरी राजस्थान भर में चलते थे फिर मैंने उनकी एक गुरु वंदना गुरु महिमा सीखी तो मैं कहीं जाता तो उसी गुरु वंदना को उसी गुरु महिमा को गाता था मुझे सुनने वाले लोग मुझे बहुत पसंद करते थे और आशीर्वाद देते थे कि आपने अच्छा गाया वहां से मेरा हौसला बढ़ता गया और वहां से मेरा सफर शुरू हो गया

 मैं आपके बारे में काफी कुछ जान के वह काफी स्टडी करके आया हूं अब आप राजस्थान में नंबर वन पोजीशन पर आए थे

यह नवी क्लास की बात है जिस विद्यालय में पढ़ता था उच्च विद्यालय में काव्य गीत व कविताओं की  प्रतियोगिता होती थी  पहले स्कूल में प्रतियोगिता फिर जिला स्तर पर उसके बाद प्रांत स्तर पर विद्या भारती संगठन का जिसमें 11 जिले हैं तो वह प्रतियोगिता आगे जाकर प्रांत स्तर पर होती थी उस समय मैंने एक काव्य गीत गाया था अरुण उदय हो चुका वीर अब कर्म क्षेत्र में जुट जाएं अपने खून पसीने द्वारा नवयुग धरती पर लाएं यह एक संघ का गीत है यह गीत जब मैंने गाय तो पहले विद्यालय  मैं फिर जिला स्तर  पर उसके बाद मुझे प्रांत स्तर पर गाने का मौका मिला वहां पर मुझे प्रथम स्थान प्राप्त कर बहुत मान सम्मान प्राप्त हुआ जोधपुर की लाल सागर के स्कूलों में गाया तो मेरा हौसला उस समय काफी बड़ा


आपको संगीत की दुनिया में आपके परिवार के द्वारा सपोर्ट मिला

मेरे पिताजी की इच्छा नहीं थी उस दौर में भजन गाने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी उस समय कहा जाता था कि एक भजन गाने वाला आदमी अपने परिवार बाल बच्चों को कैसे पालेगा  समय कुछ था भी नहीं पहले जो भजन गाने वाले लोग थे उनको सवेरे 5 किलो बाजरी या फिर कपड़े दिए जाते थे उससे घर नहीं चलता था उस समय समाज में भी भजन गाने वाले व्यक्ति की मान सम्मान नहीं होता तो ठीक है भजन गाने वाला है जब मेरे पिताजी ने यह देखा आसपास के लोगों का उनका स्पष्ट मना था जब रात को सो जाते थे तब मैं रात को दीवार  फांद  करके निकल जाता था  सवेरे  वो जल्दी घर से निकल जाते थे मैं उनके जाने के बाद में उड़ता था तो मैं  उनसे मिलता ही नहीं था  मुझे लगता था कि उनको पता चला कि मैं कहीं गया हूं तो वह मुझे मारेंगे हमारे घर के पास में एक मंदिर है माता जी का वहां पर शुक्रवार के दिन जागरण होता था तो मैं वहां चला जाता था 1 दिन वहां पर मेरे पीछे आ गए मुझे लेने के लिए  बाहर खड़े थे तो मैंने कहा मैं आता हूं तो मैं डर गया उन्होंने ने वहां इंतजार किया मैं चुपके से वहां से भाग गया फिर मैं जिन लोगों के साथ रहता था उन लोगों को मेरे पिताजी मना करते थे किसको अपने साथ में मत रखो लेकिन मैं करता गया  मुझे लगा कि एक पिता की आज्ञा का उल्लंघन कर रहा हूं मुझे इस समय एक ऐसी पीड़ा भी थी मन में एक पिता अपने पुत्र के लिए भलाई चाहता लेकिन मन उस बात को मानने के लिए तैयार नहीं था तो फिर मैं चलता गया


 लोगों का रिएक्ट आपकी जिंदगी में कैसा रहा

लोगों का रिएक्ट ठीक था भले 5 लोगों के बीच में गया या 50 के बीच पर मुझे वहां से हमेशा आशीर्वाद के रूप में प्यार मिला शायद मेरे जीवन बनने के बहुत सारे कारण है उन कारणों में से मेरे जीवन में शायद मुख्य जो कारण है यह भी रहा  है


एक बार आप घर से 100 किलोमीटर दूर साइकिल लेकर निकल गए थे

 बचपन में एक बालक के रूप में काफी उपेक्षा रहती है शायद पिता से ही रहती है गुस्सा रहता है मेरे भागने के पीछे एक जबरदस्त कारण है मैंने अपने घर में चोरी की तो मुझे घर पर बहुत जबरदस्त मार पड़ी उस गुस्से में  साइकिल लेकर यहां से रवाना हो गया मेरे गांव की  और निकल गया बालोतरा से मेरा गांव यहां से 100 किलोमीटर है मेरी जिद थी कि मैं दादा जी के पास जाऊंगा जब मैं गांव पहुंचा तो दादा जी ने कहा की तू कहां से आया उसमें मेरी उम्र भी ज्यादा नहीं थी साथ में 15 साल का था उसका


जिससे मैं आपके कैसेट बीके उस समय आप खुद आप की कैसेट बेचा करते थे

मैंने अपने जीवन की शुरुआत कैसेट की दुकान से करी थी यह सब कुछ मुझे शौक भी था तो इधर उधर कर से मैंने कैसेट की दुकान लगाएं वह भी फेल हो गई फिर मैंने दूसरी बार लगाई वह भी फेल हो गए फिर मैंने साउंड लाया लोन  लेकर वह भी फेल हो गया फिर मुझे लगा किआपके परिवार  के बारे में बताएं

 बालोतरा में मेरे पिताजी के साथ में हम तीन भाई है मैं सबसे बड़ा हूं दो मेरे से छोटे भाई हैं जो जोधपुर में रहते हैं बाड़मेर के पास छोटा सा गांव है शिवकर वहां से मेरे पिताजी 33 साल पहले बालोतरा आ गए थे मेरे जन्म के 3 साल बाद वह बालोतरा आए थे फिर यहीं बस गए और मेरी शिक्षा मेरे भाइयों की शिक्षा यहीं पर हुई और अभी मैं मेरे माता-पिता के साथ में नहीं बालोतरा में रहता हूं


शिक्षा में आपने एजुकेशन कहां तक किया

 दसवीं तक मैंने आदर्श विद्या मंदिर मैं पढ़ाई की जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक का एक विद्या भारती नाम से एक्शन चलता है जो शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करता है दसवीं तक मैं वहां पड़ा उसके बाद 12वीं की  उसके बाद मैं कॉलेज गया मेरा बीए आधा अधूरा है


यह आपका बियर आधा अधूरा कैसे रहा

 मुझे संगीत का बहुत शौक था तो मैं शिक्षा के कारण  कॉलेज जा ही नहीं पाता था फर्स्ट ईयर मैंने किया और सेकंड ईयर जब हुआ तो मैं इसमें लग गया और कुछ समय मैं कॉलेज नहीं गया फिर पढ़ाई छूट गई परीक्षा   जब मैंने पढ़ाई नहीं की थी तो मुझे लगा कि मैं परीक्षा में क्या लिखूंगा इसलिए मैंने परीक्षा ही नहीं दी

 
लेकिन आपने संगीत में बहुत कुछ लिख दिया शायद आपके   किस्मत को यही मंजूर था

 मेरे भाग्य में यही लिखा था बहुत सारे हो सकता है इसके प्रश्न उत्तर लेकिन मेरी किस्मत शायद भगवान ने यही लिखी थी बहुत कुछ पीछे होता गया लेकिन किस्मत में ऐसा लिखा था इसीलिए उसी जगह से मैंने अपने जीवन को आगे बढ़ाया


आपका जो परिवार है उस संगीत से ताल्लुक नहीं रखता

 देखे जब मैं पढ़ता था तब मुझे प्रार्थना बोलने का बहुत शौक था गाने का भी शौक था मेरे  शिक्षकों को अच्छा लगता तो प्रार्थना मुझसे करवाते थे दसवीं के महीने की तो उसके बाद हमारे आजू-बाजू जो छोटे जागरण होते थे जैसे घर में सत्संग मंदिरों में तो मैं चला जाता था कुछ मैं रामनिवास जी राव के बहुत सारे ऑडियो पूरी राजस्थान भर में चलते थे फिर मैंने उनकी एक गुरु वंदना गुरु महिमा सीखी तो मैं कहीं जाता तो उसी गुरु वंदना को उसी गुरु महिमा को गाता था मुझे सुनने वाले लोग मुझे बहुत पसंद करते थे और आशीर्वाद देते थे कि आपने अच्छा गया वहां से मेरा हौसला बढ़ता गया और वहां से मेरा सफर शुरू हो गया

 मैं आपके बारे में काफी कुछ जान के वह काफी स्टडी करके आया हूं अब आप राजस्थान में नंबर वन पोजीशन पर आए थे

यह नवी क्लास की बात है जिस विद्यालय में पढ़ता था उच्च विद्यालय में में काव्य गीता की कविताओं की  प्रतियोगिता होती थी  पहले स्कूल में प्रतियोगिता फिर जिला स्तर पर के प्रांत स्तर पर विद्या भारती संगठन का जिसमें 11 जिले हैं तो वह प्रतियोगिता आगे जाकर प्रांत स्तर पर होती थी उस समय मैंने एक काव्य गीत गाया था अरुण उदय हो चुका वीर अब कर्म क्षेत्र में जुट जाएं अपने खून पसीने द्वारा नवयुग धरती पर लाएं यह एक संघ का गीत है यह गीत जब मैंने गाय तो पहले विद्यालय सिर जिला स्तर फिर मुझे प्रांत स्तर पर गाने का मौका मिला वहां पर मुझे प्रथम स्थान प्राप्त कर बहुत मान सम्मान प्राप्त हुआ जोधपुर की लालसा के स्कूलों में गाया तो मेरा हौसला उस समय काफी बड़ा

आपको संगीत की दुनिया में आपके परिवार के द्वारा सपोर्ट मिला

मेरे पिताजी की इच्छा नहीं थी उस दौर में भजन गाने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी उस समय कहा जाता था कि एक भजन गाने वाला आदमी अपने परिवार बाल बच्चों को कैसे पालेगा इसमें कुछ था भी नहीं पहले जो भजन गाने वाले लोग थे हमको सवेरे 5 किलो बाजरी या फिर कपड़े दिए जाते थे उससे घर नहीं चलता था उस समय समाज में भी भजन गाने वाले व्यक्ति की मान सम्मान नहीं होता तो ठीक है भजन गाने वाला है जब मेरे पिताजी ने यह देखा आसपास के लोगों का उनका स्पष्ट मना था जब रात को सो जाते थे तब मैं रात को दीवार फोन करके निकल जाता था सवेरे हो जल्दी घर से निकल जाते थे मैं उनके जाने के बाद में उड़ता था तो मैं उसे मिलता ही नहीं था  मुझे लगता था कि उनको पता चला कि मैं कहीं गया हूं तो वह मुझे मारेंगे हमारे घर के पास में एक मंदिर है माता जी का वहां पर शुक्रवार के दिन जागरण होता था तो मैं वहां चला जाता था 1 दिन वहां पर पीछे आगे मुझे लेने के लिए  बाहर खड़े थे तो मैंने कहा मैं आता हूं तो मैं डर गया उन्होंने ने वहां इंतजार किया मैं चुपके से वहां से भाग गया फिर मैं जिन लोगों के साथ रहता था उन लोगों को मेरे पिताजी मना करते थे किसको अपने साथ में मत रखो लेकिन मैं करता गया  मुझे लगा कि एक पिता की आज्ञा कम है उल्लंघन कर रहा हूं मुझे इस समय एक ऐसी पीड़ा भी थी मन में एक पिता अपने पुत्र के लिए भलाई चाहता लेकिन मन उस बात को मानने के लिए तैयार नहीं था तो फिर मैं चलता गया


 लोगों का रिएक्ट आपकी जिंदगी में कैसा रहा

लोगों का रिएक्ट ठीक था भले 5 लोगों के बीच में गया या 50 के बीच पर मुझे वहां से हमेशा आशीर्वाद के रूप में प्यार मिला शायद मेरे जीवन बनने के बहुत सारे कारण है उन कारणों में से मेरे जीवन में शायद मुख्य जो कारण है यह भी रहा हूं


एक बार आप घर से 100 किलोमीटर दूर साइकिल लेकर निकल गए थे

 बचपन में एक बालक के रूप में काफी उपेक्षा रहती है शायद पिता से ही रहती है गुस्सा रहता है मेरे भागने के पीछे एक जबरदस्त कारण है मैंने अपने घर में चोरी की तो मुझे घर पर बहुत जबरदस्त मार पड़ी उस गुस्से में मैं साइकिल लेकर यहां से रवाना हो गया मेरे गांव की तरह मेरा गांव यहां से 100 किलोमीटर है मेरी जिद थी कि मैं दादा जी के पास जाऊंगा जब मैं गांव पहुंचा तो दादा जी ने कहा फिर तू कहां से आया उसमें मेरी उम्र भी ज्यादा नहीं थी साथ में 15 साल का था उसका

जिससे मैं आपके कैसेट बीके उस समय आप खुद आप की कैसेट बेचा करते थे

मैंने अपने जीवन की शुरुआत कैसेट की दुकान से करी थी यह सब कुछ मुझे शौक भी था तो इधर उधर कर से मैंने कैसेट की दुकान लगाएं वह भी फेल हो गई फिर मैंने दूसरी बार लगाए वह भी फेल हो गए फिर मैंने साउंड लाया लोन लेते हैं वह भी फेल हो गया फिर मुझे लगा कि मैं इसके लिए जन्मा ही नहीं हूं

आपने जॉब भी की थी

 मैं दिल्ली गया सूर्या फाउंडेशन में  साल भर तक वहां पर काम किया   जयप्रकाश जी अग्रवाल वहां के जो चेयरमैन है जो संघ परिवार के बालक विद्यार्थी है उनके लिए अपनी कंपनी में एक सूर्या फाउंडेशन  संस्थान की व्यवस्था की कुछ महीनों की ट्रेनिंग देने के बाद उनकी योग्यता के अनुसार उनको कंपनी में जॉब देते हैं वहां से भी में भागकर आ गया बहुत बरसो बाद जयप्रकाश जी के PA का मेरे पास में कॉल आया बोले कि मैं सूर्या फाउंडेशन दिल्ली से  जयप्रकाश जी का PA बात कर रहा हूं और वह आपसे बात करना चाहते हैं जब मैंने जयप्रकाश जी से बात की उन्होंने मुझे भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में मुझे प्रोग्राम करने के लिए कहा  गया जब मैं वहां पहुंचा तो वहां पर मेरी उनसे बातचीत हुई मैंने उनको कहा कि मैं आपके फाउंडेशन में  लेबर का कार्य कर चुका हूं बात को वह सुन के स्वयं अचंभित रह गए फिर मैंने उनको पूरी बात सुनाएं



 जब सूर्या फाउंडेशन के PA का कॉल आपके पास आता है तो आपको कैसा लगा

 उनका कॉल आया कि मैं सूर्या फाउंडेशन श्री राम राज बोल रहा हूं जेपी साहब आपसे बात करना चाहता हूं मैं एक बार तो डर गया कि इतने बरसों बाद के वहां की कोई इंक्वायरी तो नहीं निकाले फिर उन्होंने बोला कि नहीं जेपी साहब आपसे बात करना चाहते हैं जब मैं वहां पर था तो मुझे साउंड का कार्य दिया गया था एक बार कोई बारिश की वजह से वहां पर साउंड बिगड़ गया तब मुझे जेपी साहब ने जोर से खींच कर चाटा मारा था बहुत लोगों के बीच में बहुत वर्षों बाद उनके सामने बैठकर उनके जबरदस्त बुलावे पर जाना और उनके सामने गाना वहां पर उनके और भी वीआईपी लोगों के साथ बैठकर के गाना जब  उनसे मेरी बातचीत हुई तब मैंने उनको बताया और उन्होंने मुझे अपने गले से लगा दिया


संगीत की शुरुआत कैसे हुई और आपकी तालीम किस तरीके से हुई

 देखो मैं इस तालीम शब्द लिए बहुत गरीब आदमी है इस शब्द के लिए तो हूं मैं गरीब मैंने जो भी गया बाय हट गया महेंद्र सिंह पवार और कुशल बारोट जी इनका बहुत बड़ा नाम था एक समय हम भी इनको सुनने के लिए जाते थे निक्कर पहन के जिनको हम बहुत दूरी बैठकर सुनते हैं ऐसी कृपा हुई आसोतरा  ब्रह्मा जी के मंदिर मंदिर से एक ऐसा समय आया उसका कारण कुछ भी हो सकता है उसके कारण में जाना नहीं चाहता और जाऊंगा भी नहीं कुशल जी के और महेंद्र जी के गाए हुए भजन मुझे बहुत सारे याद थे और मुझे उनके साथ गाने का मौका मिला मिले जो डीपी बहुत बड़ा चमत्कार था गुरु पूर्णिमा का दिन था कुशल जी ने मुझे बोला कि आप जोधपुर आ जाओ आपका जीवन बन जाएगा फिर मैं जोधपुर गया मोइनुद्दीन जिससे मेरे मिलना  हुआ रामनिवास जी से  मिलने पर मुझे बहुत अच्छा लगा कि इतने लोगों के बीच में कार्यक्रम भी होते हैं पाली जिले में एक मंदिर है मनकेश्वर महादेव फिर मैं परशुराम महादेव लखोटिया पर मुझे जाने का मौका मिला


राजस्थानी संगीत का कुंभ का जाए लाखोटिया मंदिर है वहां पर हर कोई सिंगर पहुंचना चाहता है लखोटिया से जिसकी शुरुआत नहीं हुई हर किसी के मन की बात होती है कि मैं लाखोटिया में एक बार परफॉर्म जरूर करूं आप हम पहुंचे तो आपका सफर वहां का कैसा था

 मैं उधार पैसे  लेकर गया था लखोटिया 3 साल तक में लगातार गया घूमता रहा उस मेले में मैंने अप्रोच नहीं लगे उस मंच पर गाने के लिए मैं हर बार कोशिश करता था कि मुझे इस मंच पर गाने का मौका मिले  चौथी बार जब मैं वहां गया तो मुझे प्रथम पुरस्कार मिला  जब मैं वह पुरस्कार ले रहा था तब मुझे मन में लगा कि इतने सारे लोगों ने गाया पर पुरस्कार मुझे ही कैसे मिला मेरे मन में ऐसा फील हुआ कि मैंने आज इतना अच्छा भी कुछ जब उसको इस प्रकार के मेरे हाथ लग गया तो मेरे अंदर एक वेव रही थी की तो उसके लायक नहीं है फिर भी तुझे यह मिला

आपको  पुरस्कार मिलने का रीजन क्या था फिर आपने जो गाया वह लोगों को पसंद आया

 वह पुरस्कार मेरे जीवन में इतिहास बन गया मेरे जीवन की एक सीडी और बढ़ गई थी

जैसे आपको कहीं गाने के लिए जाना था या फिर कहीं परफॉर्म करने के लिए जाना था उस टाइम संसाधन भी कम थे तो फिर आप किस तरह से कैसे हैंडल करते थे इसके बारे में आप कुछ बताइए

 अभी जो दौर चल रहा है वह आधुनिक  दुनिया का सबसे ऊंचा दौर चल रहा है अब 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली गाड़ियां हैं उस टाइम जब हमें कहीं 200 किलोमीटर या 250 किलोमीटर जाना होता था तो हम सवेरे घर से 10:00 बजे निकलते थे तब जाकर शाम को 7 या 8 बजे तक पहुंचते थे उस समय गाड़ी का किराया भी 500 से लेकर 1000 के बीच में ही रहता था आजकल के कलाकारों के लिए इतनी कठिनाई की बात नहीं है आजकल के कलाकारों के हर किसी कलाकार के पास में 25 से 30,000 का मोबाइल मिल जाएगा उस समय हमारे पास में यह सुविधा भी नहीं थी मैंने जो इस लाइन में संघर्ष किया है वह मुझे नहीं लगता कि आजकल जो नए कलाकार आ रहे हैं मेरे भाई बंधु वह कर रहे हैं या फिर उनको करना भी पड़ेगा

सर जब आपने गाना शुरू किया था तब आपने सबसे पहले गाना कौन सा गाया था उस टाइम आपको लगा कि यह मेरा गाना हिट जाएगा और अपनी गाड़ी पटरी पर निकल जाएगी

 एक मेरा बहुत प्रसिद्ध भजन हुआ था संता वाली  टोगरी उसी ने  मेरी गाड़ी पटरी पर  लाई और उस दिन से आज भी चल रही है

 जब आपकी गाड़ी पटरी पर निकल पड़ी थी आप के भजन  जब लोग सुनने लगे थे तब आपके घर की तरफ से या परिवार की तरफ से कैसा रिस्पॉन्स आने लगा था

 धीरे-धीरे उनका स्वभाव बदलता गया फिर बाद में उनको एक दिन विश्वास हो गया  अब इस का काम चलेगा फिर उनका बहुत जबरदस्त मेरे साथ में सहयोग रहा आज तक भी रहता है मेरी माता जी बहुत चिंता करती थी जब मैं बाहर कार्यक्रम के लिए  रहता हूं आज मेरे पास मेरे माता पिता का पूर्ण सहयोग रहता है